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मनरेगा कमजोर करने की साजिश के खिलाफ जनआंदोलन, बोले प्रभु टोकिया – यह गरीबों की रोज़ी पर सीधा हमला

DNH / Amit Singh

ग्रामीण मजदूरों के काम पाने के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए “मनरेगा बचाओ संघर्ष” अभियान के तहत दादरा एवं नगर हवेली में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने वाली नीतियों के खिलाफ जनता को संगठित करना और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना है।

इस अवसर पर दादरा एवं नगर हवेली प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष प्रभु टोकिया ने कहा कि मनरेगा कोई दया या राहत योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों का कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। इसे कमजोर करना सीधे-सीधे गरीबों के जीवन और आजीविका पर हमला है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 100 दिन का रोजगार, समय पर मजदूरी और सम्मानजनक जीवन का अधिकार देता है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों के कारण यह योजना लगातार कमजोर की जा रही है, जिससे गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
अभियान के दौरान ग्रामीण मजदूरों से संवाद कर उन्हें उनके अधिकारों, मनरेगा कानून, ग्राम सभा की भूमिका और सामूहिक संघर्ष के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही ग्राम सभाओं के माध्यम से मनरेगा को मजबूत करने और उसकी बहाली के लिए प्रस्ताव पारित करने की अपील की गई।
अभियान में मनरेगा के तहत मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे चार प्रमुख हमलों को रेखांकित किया गया—
पहला, काम मांगने के बावजूद मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा, जिससे 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी व्यवहार में समाप्त होती जा रही है।

दूसरा, मजदूरी भुगतान में भारी देरी हो रही है, जिससे मजदूर कर्ज और भुखमरी की ओर धकेले जा रहे हैं।
तीसरा, ग्राम पंचायतों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर काम चुनने और लागू करने की शक्ति छीनी जा रही है और मनरेगा का विकेंद्रीकृत ढांचा टूट रहा है।
चौथा, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है और केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है, वहीं मनरेगा बजट में लगातार कटौती की जा रही है।
अभियान के अंत में प्रमुख मांगें रखी गईं, जिनमें सभी मजदूरों को समय पर काम की पूरी गारंटी, समय पर और पूरा मजदूरी भुगतान, मनरेगा बजट में पर्याप्त वृद्धि तथा ग्राम पंचायतों के अधिकारों की बहाली शामिल है। साथ ही मनरेगा को कमजोर करने वाले सभी बदलाव तुरंत वापस लेने की मांग की गई।
प्रभु टोकिया ने कहा कि “मनरेगा बचाओ संघर्ष” आने वाले समय में भी मजदूरों के हक की इस लड़ाई को पूरी मजबूती से आगे बढ़ाएगा, ताकि हर ग्रामीण परिवार को रोजगार, सम्मान और सुरक्षा मिल सके।

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